टेसू-झेंझी विवाह की लोकपरंपरा : लोकाख्यान एवं सांस्कृतिक महत्त्व
भारतीय लोकसंस्कृति विविध पर्वों, अनुष्ठानों, लोकगीतों और मौखिक आख्यानों के माध्यम से अपनी ऐतिहासिक स्मृति को सुरक्षित रखती आई है। उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होने वाला टेसू-झेंझी विवाह इसी लोकसांस्कृतिक परंपरा का एक महत्त्वपूर्ण उदाहरण है। यह परंपरा प्रतीकात्मक विवाह-संस्कार, बाल सहभागिता, सामुदायिक सहयोग, क्षेत्रीय लोकगीतों तथा पौराणिक आख्यानों के समन्वय से निर्मित हुई है। टेसू को वर और झेंझी को वधू के रूप में प्रतिष्ठित करके उनके विवाह का आयोजन किया जाता है। इस परंपरा से संबंधित लोकाख्यानों में टेसू की पहचान महाभारत के बर्बरीक से भी जोड़ी जाती है, यद्यपि इस संबंध की ऐतिहासिक प्रामाणिकता स्थापित करने के लिए स्वतंत्र साक्ष्यों की आवश्यकता है। प्रस्तुत शोध आलेख का उद्देश्य औरैया जिले में प्रचलित टेसू-झेंझी विवाह की लोकपरंपरा के ऐतिहासिक संदर्भों, अनुष्ठानिक स्वरूप, लोकसाहित्यिक अभिव्यक्तियों तथा सामाजिक-सांस्कृतिक महत्त्व का विश्लेषण करना है। साथ ही, बदलते सामाजिक परिवेश में इस परंपरा के संरक्षण की संभावनाओं पर भी विचार किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होत...